"कर्मठ' बने । काम कने वाले बनें ।'काम टालने बाला' न बनें ।परिश्स्थ्तियों के आदर्श होनें का इंतजार न करें । वे कभी आदर्श नहीं होंगी । भबिष्य की बाधाओं और कठिनाईयों की उमीद करें और जब वे आयें,तब आप उन्हें सुलझानें का तरीका खोजें ।याद रखे,केबल बिचारों के सफलता नहीं मिलती । बिचारों का मूल्य तभी हैं,जब आप उन पर अमल करें ।डर भागने और आत्मविश्वास हासिल करने कें लिए कर्म करें । जिस काम से आप डरतें हों,वोह और आपका डरभाग जायेगा ।कोशिश करके देखे ।अपने मानसिक इंजन को मशीनी तरीकें से चालू करें । सही मूड बन्ने का इंतजार न करें । कर्म शुरू कर सें, और आपका मूस अपने आप सही हो जायेगा ।आभी कम शुरू करने के बारे में सोचे । कल,अगले सप्ताह,बढ़ में और इसी तरह के शब्द असफलता के शब्द सभी नहीं के पर्ययाबची हैं व् इस तरह के वयक्ति बनें,'में अभी इस काम को शुरू कर देता हु ।'कार्य में जुट जायें । आर्य की तैयारी में समय बर्बाद न करें । इसके बजाय सीधे काम में लग जायें।पहल करें ।संघर्ष करें । गोद छिनकर गोल की तरफ दौर लगायें ।स्वंयसेवक बनें।यह बताएं की आपमें कर्म करने की योगता और महत्वाकांक्षा हैं ।
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